राखी पर्व विशेष: भाई बहन की प्रेम को समर्पित
~~○भाई बहन के रिश्ते को समर्पित मेरी यह कविता○~~ है दिन आज राखी के महापर्व-त्यौहार का । यह पर्व नहीं महाउत्सव है भाई-बहन के प्यार का ।। तुम आज ना मांगो मुझसे कोई रक्षा का वचन । तुम्हारी हर खुशी के लिए समर्पित है मेरा तन मन ।। लेकिन तुम कोई अबला नारी नहीं इस युग में । तुमसे ही तो क्रांति के दीप जले हर इक युग में ।। जो आज मैं तुमको ताउम्र रक्षा का वचन दे जाऊंगा । यकीनन सदा के लिए खुद पर निर्भर बनाऊंगा ।। मुझ पर निर्भर तुम क्या अपना व्यक्तित्व बनाओगी । कैसे इस विशाल भारत देश का नेतृत्व कर पाओगी?? भूल अपनी मौलिक ताकत तुम कठपुतली सी रह जाओगी। जरा बतलाओ मुझे तुम कैसे फिर काम देश के आओगी?? जीवन जो राष्ट्र के काम ना आए वह जीवन जीना क्या व्यर्थ नहीं? आत्मरक्षा और स्वाभिमान से बेहतर जीने की कोई शर्त नहीं ।। तुम नहीं कोई कटी पतंग सी जो तुमको उड़ने का अधिकार नहीं । जब बेटा-बेटी एक समान तो क्यों बेटों जैसा तुम्हें प्यार नहीं?? जीवन राखी के महापर्व की पावन बेला पर तुमको बतलाता है l अपनी प्यारी बहिन की खातिर सदा गीत वो मंगल गाता है ll ~○●जीवन चंद्र○●~