Posts

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, आज मेरे देश का किसान

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, आज मेरे देश का किसान दो कौड़ी के लोगों के आगे, लाचार खड़ा है पालनहार पहले मार मौसम की खाई, फिर जैसे तैसे खड़ा हुआ अब साहूकार का सूद चुकाकर, बेचैनी में पड़ा हुआ बेचैनी इस बात की है कि बीज, दवा कहां से लाऊं। जो बैंक से कर्ज लिया तो फिर पैसा कैसे लौटाऊं। भूमि बंजर रह जाए तो फिर इस दुनिया का क्या होगा। अपनी इस मजबूरी को किसे,कैसे बदलाऊं । बीवी बोली यह लो गहने साहूकार को गिरवी रख दो। बीज, दवा, पानी से खेत सीचकर हरे-भरे कर दो। फसल काट कर फिर मेरे गहने छुड़वा देना। जो बचे कुछ रूपया तो, मां का चश्मा बनवा देना। सुनकर बीवी की बातें, दिल किसान का पसीज गया। हारकर सारी उम्मीदें भी, पालनहार फिर जीत गया। उम्मीद करता है तुमसे मेरे देश का पालनहार। कद्र करो अन्न जल की, ना व्यर्थ करो एक दाना भी यार। ~○● जीवन चंद्रा○●~
अब कौन रोज़ रोज़ ख़ुदा ढूंढे, जिसको न मिले  वही ढूंढे .. रात आयी है, सुबह भी होगी, आधी रात में कौन सुबह ढूंढे .. ज़िंदगी है जी खोल कर जियो, रोज़ रोज़ क्यों जीने की वजह ढूंढ़े .. चलते फिरते पत्थरों के शहर में, पत्थर खुद पत्थरों में  भगवान ढूंढ़े .. धरती को जन्नत बनाना है अगर, हर शख्स खुद में पहले इंसान ढूंढे...!!!

करवा चौथ विशेष

करवाचौथ विशेष  जानू इस बार करवाचौथ पर मुझे क्या गिफ्ट दोगे ??" "जो आप कहोगी" नहीं बताओ ना क्या देने वाले हो मुझे इस बार? "सोच रहा हूँ तुम्हे एक अच्छी सी ड्रेस गिफ्ट करूं " क्या जाना इस बार भी ड्रेस ! कुछ और समझ नहीं आता क्या  तुम्हे ?? "अरे ड्रेस अच्छा गिफ्ट है इस  स्पेशल डे पर" वही तो कह रही हूँ कि स्पेशल डे पर कुछ खास गिफ्ट होना चाहिए ना" "मेरी जान कैसी बातें करती हो, मेरे सभी दोस्त अपनी गर्लफ्रेंड को ड्रेस ही गिफ्ट कर रहे है" "नहीं वो सब मुझे नहीं पता ! मुझे कुछ अलग चाहिए" तो ठीक है फिर कही घुमने चलेंगे फिर बाहर डिनर करेंगे" नहीं ये सब नहीं ये तो हम अक्सर करते हैं "तो तुम ही बताओ क्या चाहिए तुम्हे" "दोगे ना" "हाँ" "पक्का" "हाँ बाबा पक्का बोलो तो सही" "मुझे तुममे वो लड़का चाहिए जिसे मैने प्यार किया था" "कहना क्या चाहती हो??" "मुझे चाहिए कि तुम पहले जैसे बन जाओ जैसे हमारे रिलेशन के शुरुआती दिनों में थे" पागल हो गयी हो क्य...

राखी पर्व विशेष: भाई बहन की प्रेम को समर्पित

~~○भाई बहन के रिश्ते को समर्पित मेरी यह कविता○~~ है दिन आज राखी के महापर्व-त्यौहार का । यह पर्व नहीं महाउत्सव है भाई-बहन के प्यार का ।। तुम आज ना मांगो मुझसे कोई रक्षा का वचन । तुम्हारी हर खुशी के लिए समर्पित है मेरा तन मन ।। लेकिन तुम कोई अबला नारी नहीं इस युग में । तुमसे ही तो क्रांति के दीप जले हर इक युग में ।। जो आज मैं तुमको ताउम्र रक्षा का वचन दे जाऊंगा । यकीनन सदा के लिए खुद पर निर्भर बनाऊंगा ।। मुझ पर निर्भर तुम क्या अपना व्यक्तित्व बनाओगी । कैसे इस विशाल भारत देश का नेतृत्व कर पाओगी?? भूल अपनी मौलिक ताकत तुम कठपुतली सी रह जाओगी। जरा बतलाओ मुझे तुम कैसे फिर काम देश के आओगी?? जीवन जो राष्ट्र के काम ना आए वह जीवन जीना क्या व्यर्थ नहीं? आत्मरक्षा और स्वाभिमान से बेहतर जीने की कोई शर्त नहीं ।। तुम नहीं कोई कटी पतंग सी जो तुमको उड़ने का अधिकार नहीं । जब बेटा-बेटी एक समान तो क्यों बेटों जैसा तुम्हें प्यार नहीं?? जीवन राखी के महापर्व की पावन बेला पर तुमको बतलाता है l अपनी प्यारी बहिन की खातिर सदा गीत वो मंगल गाता है ll ~○●जीवन चंद्र○●~

संस्मरण: मेरठ शहर की यादें

पहाड़ में कोई धार्मिक कार्यक्रम था। मम्मी और मामा  दोनों पहाड़ गए थे। क्योंकि मेरा स्कूल था तो मुझे मेरठ ही रुकना  पड़ा। पेट दर्द का वही बहाना बनाकर जिसका इलाज आज तक किसी डॉक्टर को नहीं मिला, मैंने भी स्कूल से छुट्टी ले ली। पिताजी ऑफिस चले गए और भैया स्कूल। उन दिनों हमारे मोहल्ले में साइकिल सीखने का बहुत क्रेज था। मेरे हमउम्र अभी नई नई साइकिल खरीद रहे थे। मैंने भी सोचा नीचे रखी मामाजी की 24 इंची साइकिल से आज सारा दिन प्रैक्टिस करूंगा। नाश्ता करने के बाद घर की चाबी पड़ोस वाले घर में रखकर मैं साइकिल चलाने लगा। आज मुझे कोई  रोकने टोकने वाला नहीं था। हाँ, मम्मी घर पर होती तो कभी भी इतनी बड़ी साइकिल चलाने की इजाजत नहीं देती। घर की गैलरी से ही साइकिल पर सवार मैं अनिल हेयर ड्रेसर से होते हुए सीधे जे-ब्लॉक की ओर निकला गय। काफी अच्छा लग रहा था कि आज मैं गद्दी पर बैठकर इतनी ऊंची साइकिल चला रहा हूं। पांच-छह चक्कर लगाने के बाद दिनेश इलेक्ट्रॉनिक्स के सामने अचानक मेरी साईकिल अनियंत्रित हो गई और मैं गिर पड़ा। पीछे से आ रही मेरी क्लास में पढ़ने वाली मोनिका की दीदी अर्चना ने मुझे उठाते...